मेरे ब्लॉग को पढने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद.....

मेरी कलम से

Wednesday, November 26, 2014

बचपन की यादें

बचपन, एक ऐसा मधुर शब्द जिसे सुनते ही लगता है मानो शहद की मीठी बूंद जुबान पर रख ली हो। जिसकी कोमल कच्ची यादें जब दिल में उमड़ती है तो मुस्कान का लाल छींटा होंठों पर सज उठता है। जब भी इन महकते हरियाले पन्नों को फुरसत में बैठकर खोला और इन पर जमी धूल की परतों पर यादों की फुहारें डाली, भीनी-भीनी सुगंध की बयार ने उठकर मन को भावुक बना दिया। बचपन वही तो होता है जो कंचे और अंटियों को जेबों में भरकर सो जाए, बचपन यानी जो पतंगों को बस्ते में छुपाकर लाए, बचपन मतलब जो मिट‍्टी को सानकर लड्डू बनाए, बचपन बोले तो वो जो बड़ों की हर चीज को छुपकर आजमाएं। बचपन यानी पेड़ पर चढ़ने के बाद जो उतरने के लिए चिल्लाए, बचपन कहें तो वो जो अंदर से दरवाजा बंद कर बड़ों की परेशानी बन जाए, कुल मिलाकर बचपन यानी शरारत, शैतानी और मस्ती की खिलखिलाती पाठशाला। गुलेल, गिल्ली-डंडा, तितली पकड़ना, घरौंदे बनाना ये सब आज बीते बचपन की बात हो गई है। आज का बचपन इतना सुविधायुक्त और वैभवशाली है कि उन खेलों से कोसों दूर है जिन्हें खेलकर कपड़ों से गीली मिट्टी की खुशबू आती थी। आज का साफ-सुथरा अभिजात्य बचपन वीडियो गेम, कंप्यूटर, मोबाइल, ऑनलाइन गेम्स के बीच व्यतीत हो रहा है। कभी-कभी लगता है अभिभावक ये सब इन्हें नहीं देंगे तो जैसे ये बड़े ही नहीं होंगे। पालकों को लगता है इनके बिना बच्चों का मानसिक विकास अधूरा रह जाएगा। सच तो यह है कि पुराने और पारंपरिक खेलों से हमने और हमारे बड़ों ने जो सीखा-समझा है वह इन अत्याधुनिक खेलों के बस की बात ही नहीं है। धूल और माटी में सनकर ही हमने जाना कि आंगन में कितने और कैसे-कैसे पौधे हैं। छुईमुई कैसी होती है? तुलसी को आंगन की रानी क्यों कहा जाता है? घोंघें कैसे अपने ही घर को सिर पर उठाए चलते हैं। हथेली के ऊपर रेत और मिट्टी चढ़ाकर घरौंदे बनाते हुए अपना घर बनाने की सीख ले ली। जब नन्हे शंख और सीपी से उसे सजाकर आत्मीयता से थपथपाया तो खूबसूरत घर की परिभाषा भी जानी। गेहूं, धान, ज्वार और मूं ग के इधर-उधर बिखरे दाने भीगकर कैसे अंकुरित हो जाते हैं, यही प्रस्फुटित अंकुर पहले पौधे और बाद में पेड़ बन जाते हैं, यह सब हमने किताबों में बहुत बाद में पढ़ा हमारे भोले बाल-मन ने तो बगिया में घुमते हुए ही अनुभूत कर लिया था। हो सकता है उस वक्त का समझा वैज्ञानिक रूप से पूर्णत: सत्य और वास्तविक ना हो लेकिन मिट्टी में रच-बस कर प्रकृति से जो अनमोल रिश्ता और संवेगात्मक लगाव हमारे दिलों ने उस वक्त बनाया था वह आज तक कायम है। मिट्टी की वह मीठी और महकती सौंधी गंध भावनाओं में उतर कर ह्रदय को कैसे स्पर्श कर गई थी उसे आज भी शब्दों में पिरोकर व्यक्त करना मुश्किल है। तितली की सुंदर चित्रकारी को देखकर हमने ना जाने कितने कल्पना के घोड़े दौड़ाए, कौन बैठकर इतनी बारीकी से रंगों को सजाता है? उन्हें देखते हुए कब छोटे-छोटे कच्चे हाथों ने नन्हे ड्राइंग ब्रश उठा लिए पता ही नहीं चला। मां के आटा गूंथते ही चहचहाती गौरेयों का समूह खिड़की पर मंडराने लगता तो मां बताती, देखों इसे कहते हैं समय की पाबंदी। अक्सर सोचती हूँ कि यदि बचपन में ही सबकुछ सैद्धांतिक, तार्किक और वैज्ञानिक तरीके से सीख लिया होता तो आज किस भोली समझ और मासूम ज्ञानार्जन को याद करके मुस्कराती? बचपन आज भी भोला और भावुक ही होता है लेकिन हम उन पर ऐसे-ऐसे तनाव और दबाव का बोझ डाल रहे हैं कि वे कुम्हला रहे हैं। उनकी खनकती-खिलखिलाती किलकारियां बरकरार रहें इसके ईमानदार प्रयास हमें ही तो करने हैं। देश के ये गुलाबी नवांकुर कोमल बचपन की यादें सहेजें, इसलिए जरूरी है कि हम उन्हें कठोर और क्रूर नहीं बल्कि मयूरपंख-सा मुलायम मुस्कुराता लहलहाता बचपन दें। उनका नटखट रूप यूं ही खटपट करता रहे, मीठे तुतलाते बोलों से पट-पट करता रहे, बचपन के हक में यह दुआ आज हमें मांगनी ही होगी।

Monday, April 9, 2012

जिंदगी एक सफर है सुहाना...



मौत आनी है आएगी एक दिन, जान जानी है जाएगी एक दिन। ऎसी बातों से क्या घबराना, यहां कल क्या हो किसने जाना......जिंदगी और मौत दोनों को ही समान रूप से देखने वाले हसरत जयपुरी की जिंदगी के प्रति फलसफा उनकी रचित इन्हीं पंक्तियों में समाया हुआ है।

मुशायरों और महफिलों में मिली बेपनाह कामयाबी ने बतौर बस कंडक्टर अपने करियर की शुरूआत करने वाले इकबाल हुसैन को फिल्म जगत का अजीम शायर और गीतकार हसरत जयपुरी के रूप में स्थापित कर दिया जिन्होंने लगभग तीन दशकों तक अपने रचित गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। 15 अप्रैल 1918 को जयपुर शहर में जन्में हसरत जयपुरी ने बारहवीं तक की शिक्षा अंग्रेजी माध्यम में पूरी की। इसके बाद वह अपने दादा फिदा हुसैन से उर्दू और फारसी की तालीम लेने लगे।

बीस वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते उनका झुकाव शेरो-शायरी की तरफ होने लगा और इसके बाद वह छोटी छोटी कविताएं लिखने लगे। वर्ष 1940 में अपने सपनों को नया रूप देने के लिए हसरत जयपुरी मुंबई पहुंचे जहां उन्होंने बस कंडक्टर के रूप में अपने व्यवसायिक जीवन की शुरूआत की। इस काम के लिए उन्हें मात्र 11 रूपए प्रति माह वेतन के रूप मे मिला करता था। इस बीच उन्होंने मुशायरें के कार्यक्रम में भी भाग लेना शुरू किया जहां उन्हे काफी शोहरत मिलने लगी।

मुशायरे के एक कार्यक्रम मे पृथ्वी राज कपूर उनके गीत को सुनकर काफी प्रभावित हुए और उन्होंने अपने पुत्र राजकपूर को हसरत जयपुरी से मिलने की सलाह दी। राजकपूर उन दिनों अपनी फिल्म बरसात के लिए गीतकार की तलाश कर रहे थे। उन्होंने हसरत जयपुरी को मिलने का न्योता भेजा। इसे महज एक संयोग ही कहा जायेगा कि फिल्म बरसात से ही संगीतकार शंकर जयकिशन ने भी अपने सिने कैरियर की शुरूआत की थी।

राजकपूर के कहने पर शंकर जयकिशन ने हसरत जयपुरी को एक धुन सुनाई और उसपर उनसे गीत लिखने को कहा। धुन के बोल कुछ इस प्रकार थे- "अंबुआ का पेड़ है वहीं मुंडेर है आजा मेरे बालमा काहे की देर है" शंकर जयकिशन की इस धुन को सुनकर हसरत जयपुरी ने गीत लिखा "जिया बेकरार है छाई बहार है आजा मेरे बालमा तेरा इंतजार है"। वर्ष 1949 प्रदर्शित फिल्म बरसात में अपने इस गीम की कामयाबी के बाद हसरत जयपुरी रातोंरात बतौर गीतकार अपनी पहचान बनाने में सफल हो गए।

फिल्म बरसात की कामयाबी के बाद राजकपूर, हसरत जयपुरी और शंकर जयकिशन की जोड़ी ने कई फिल्मों मे एक साथ काम किया। इनमें आवारा, श्री 420, चोरी चोरी, अनाड़ी, जिस देश में गंगा बहती है, संगम, तीसरी कसम, दीवाना, एराउंड द वर्ल्ड, मेरा नाम जोकर, कल आज और कल जैसी फिल्में शामिल है।

शंकर जयकिशन की जोड़ी प्रसिद्ध गीतकार हसरत जयपुरी के साथ भी खूब जमी। इस जोड़ी के गीतों में शामिल कुछ गीत हैं- छोड़ गए बालम मुझे हाय अकेला , हम तुमसे मोहब्बत करके सनम, इचक दाना बिचक दाना, आजा सनम मधुर चांदनी में हम, जांउ कहा बता ये दिल, एहसान तेरा होगा मुझपे, तेरी प्यारी प्यारी सूरत को, तुम रूठी रहो मैं मनाता रहूं, बहारों फूल बरसाओं मेरा महबूब आया है, दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई, कौन है जो सपनो मे आया, जाने कहां गये वो दिन और जिंदगी एक सफर है सुहाना।

यूं तो हसरत जयपुरी फिल्मों के लिए हर तरह के गीत लिखने में सक्षम थे लेकिन उनकी पसंद की बात की जाए तो उन्हें फिल्मों के शीर्षक पर गीत लिखने में महारत हासिल थी। फिल्मो के लिए शीर्षक पर लिखना उन दिनों काफी बड़ी बात समझी जाती थी। हसरत जयपुरी ने कई फिल्मों के लिए शीर्षक गीत लिखकर उन फिल्मों को सफल बनाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

हसरत जयपुरी को दो बार फिल्म फेयर अवार्ड से सम्मानित किया गया है। उन्हें अपना पहला फिल्म फेयर पुरस्कार वर्ष 1966 में फिल्म सूरज के गीत "बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है" के लिए दिया गया था। वर्ष 1971 में फिल्म अंदाज मे "जिंदगी एक सफर है सुहाना" गीत के लिए भी हसरत जयपुरी सर्वश्रेष्ठ गीतकार के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किए गए।

तीन दशक लंबे अपने सिने कैरियर में 300 से अधिक फिल्मों के लिए लिखे लगभग 2000 गीतों के साथ गीत संगीत की दुनिया में बेजोड़ मुकाम हासिल करने वाला यह महान शायर और गीतकार 17 सिंतबर 1999 को इस दुनिया से रूखसत हो गया

Wednesday, April 4, 2012

प्यार की छोटी सी कहानी



आज प्यार को चाहे हम और आप कुछ भी समझते हों लेकिन प्यार वास्तव में हमेशा से ही दो शरीर का नहीं बल्कि उनकी आत्मा का मिलन है. प्यार को समझना वैसे तो बहुत मुश्किल है लेकिन एक छोटी सी कहानी इस प्यार को बहुत अच्छे ढंग से बताती है जिसमें प्यार को पाने के लिए लोग मौत तक की परवाह नहीं करते....
एक दिन एक चिड़िया को एक सफेद गुलाब से प्यार हो जाता है.
वो चिड़िया अपने प्यार का प्रस्ताव लेकर वो सफेद गुलाब के पास गयी.
लेकिन वो सफेद गुलाब उसके प्यार को नकार दिया.
लेकिन वो चिड़िया प्यार में पागल बार - बार उस सफेद गुलाब के पास गयी.
उसके प्यार को वो सफेद गुलाब नहीं समझ पाया और उससे पीछा छुड़ाने के लिए
एक दिन सफेद गुलाब बोला की यदि जिस दिन मै लाल रंग का हो जाऊंगा उस दिन मै तुमसे प्यार करूँगा
यह सुनकर चिड़िया ख़ुशी से उस गुलाब के पौधे के पास लोटने लगी. उस चिड़िया प्यार में पागलो की तरह लोटने लगी.
गुलाब के कांटो से वो चिड़िया के बदन से खून बहने लगा और खून बहते बहते वह सफेद गुलाब लाल रंग का हो गया
उसके यह प्यार को देखकर सफेद गुलाब जो लाल रंग का हो जाता है उसे भी उस चिड़िया से प्यार हो जाता है.
और वो गुलाब उससे अपने प्यार को बताने के लिए आगे बढता है. तो देखता है की , चिड़िया मर गयी है
यह देखकर वह गुलाब बहुत रोया , बहुत दुखी हुआ और ऐसे ही वो एक दिन सूख गया.

इसलिए कहते है की , प्यार कभी भी किसी से भी हो जाता है . प्यार छोटा बड़ा आमिर गरीब नहीं देखता प्यार तो बस दो आत्मायो को मिलन होता है
सच्चा प्यार कभी किसी इन्तहान का मोहताज नहीं होता प्यार का कभी भी इन्तहान नहीं लेना चाहिए................

Thursday, March 29, 2012

जिसे करते हैं आप प्यार, क्या वो भी है बेकरार..




अगर आप किसी लड़की को चाहते हैं, लेकिन आपको ये नहीं मालूम कि आखिर वो सिंगल है या नहीं। उसका कोई ब्वॉयफ्रेंड या प्रेमी है या नहीं। वो भी आपकी तरह बेकरार है या नहीं। तो आपको करार पहुंचाने के लिए और प्यार का पहला कदम बढ़ाने के लिए कुछ मंत्र या टिप्स हैं, जिनके जरिए आप किसी लड़की का लव स्टेटस जान सकते हैं।
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अगर वो आंखे ना चुराए...
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अगर वो लड़की इधर-उधर बेवजह देखती नजर आए, किसी को ढूंढती नजर आए और वो आपसे आंखें ना चुराए.. तो मान लीजिए कि उसे किसी हमदम की तलाश है। क्योंकि अगर कोई लड़की किसी के साथ रिलेशनशिप में है तो वो अपने आस-पास कम ही नजरें घुमाती है।

जब नजरों से नजर मिले और वो आंहें भरे...

अगर आप किसी लड़की को चाहते हैं और ये जानना चाहते हैं कि क्या वो आपको भी चाहती है, तो जरा उसकी नजरों को पढ़िए। अगर वो आपसे नजरें मिला रही है और साथ में मुस्कुरा रही है, तो बस भइया कुड़ी आप पर फिदा है। फिर हो जाईए तैयार, क्योंकि शायद यही है प्यार....

दूरी के साथ, खुलकर करे सबसे बात

अगर वो लड़की कहीं भी किसी दूसरे लड़के के साथ खुलकर बात करती हो, मगर साथ में एक दूरी का भी ख्याल रखती हो तो यह दिखाता है कि वो लड़की बिल्कुल भी रूढ़िवादी या पुराने ख्यालों की नहीं। यानी वो खुले विचारों वाली लड़की है, जो आपके प्रपोजल पर हाय-तौबा नहीं मचाएगी और अगर आपमें दम है तो हसीना मान ही जाएगी।

प्रेमी जोड़ों को देख अगर तरसे मन..

अगर किसी प्रेमी जोड़े को देखकर वो लड़की उदास हो जाती है, उसके चेहरे के भाव बदल जाते हैं.. तो इसका मतलब है कि वो भी चाहती है कि कोई उसका भी साथी हो, जिसके साथ वो कुछ अच्छे पल बिता सके, हाथों में हाथ डाल कहीं जा सके और अपने तन्हाईओं का शोर मिटा सके। तो आप इस मौके का फायदा उठा सकते हैं और उसे जता सकते हैं कि आप ही हैं उसे सुख-दुख के हमसफर।

बॉडीलैंग्वेज करेगी सबकुछ बयान

बॉडीलैंग्वेज ऐसी भाषा है जिसे पढ़कर आप किसी लड़की की दिली तमन्नाओं को जान सकते हैं। जरा गौर से देखिए उस लड़की की अदाओं को वो सबकुछ बयान करेगी, जो वो लड़की खुद अपने होंठों से बयान न कर पाएगी।

बातों-बातों में छू लेना

अगर वो बातों-बातों में आपको छूती है, आपका हाथ पकड़ती है तो समझिए उसे आपके छूने पर भी कोई हर्ज नहीं। अगर वो आपसे एक दूरी बनाकर चलती है, बात भी कोसों दूर से करती है तो आप भी इस दूरी का ख्याल रखिए।

अगर वो हो चैटरबॉक्स

अगर वो लड़की चैटरबॉक्स की तरह आपसे बेवजह बातें करती जाए। भले ही वो बातें उसके डेली रूटीन से जुड़ी हो, जिसमें दुनिया भर का किस्सा हो और भले ही उसमें आपका जरा सा भी ना हिस्सा हो। लेकिन ध्यान रखिए अगर उसमें किसी दूसरे लड़के का जिक्र ना हो तो वो लड़की जताना चाहती है कि उसकी जिंदगी में कोई दूसरा शख्स नहीं है।

गर्लफ्रेंड्स के साथ ही दिखाई दे हर बार

अगर आप उस लड़की को बार-बार उन्हीं गिनी-चुनी गर्लफ्रेंड्स के साथ देखते हैं, तो इसका मतलब है कि उसकी कंपनी में कोई मेल पार्टनर नहीं है और वो पूरी तरह से सिंगल है।

गलत ना समझें दोस्ती को

अगर वो लड़की काफी फ्रेंडली हो और किसी से भी खुलकर बात करती हो तो इसका गलत मतलब मत निकालिए। ये उसकी फितरत है और यही दिखाता है कि वो बिल्कुल अकेली है। क्योंकि अगर कोई लड़की किसी के साथ सीरियस रिलेशनशिप में हो तो वो किसी दूसरे लड़के के साथ बातें करने में हिचकिचाएगी और एक दूरी जरूर बनाएगी।

सीधी बात, नो बकवास

अगर आप इन तरीकों से इत्तेफाक नहीं रखते और बिना टाइम खराब किए सीधा अपना लक आजमाना चाहते हैं, तो उस लड़की के पास डायरेक्ट जाईए, उससे बात कीजिए और कुछ वक्त साथ बिताने के बाद उसका फोन नंबर मांगिए। अगर वो लड़की अपना नंबर नहीं देना चाहती तो समझिए वो आपसे दूरी बनाना चाहती है। भले ही इसमें रिस्क है, लेकिन हुजूर रिस्क से ही बरकत है। तो फिर ट्राई-ट्राई एगेन......लगे रहिए कहीं तो बरकत होगी।

प्यार क्या है ?






प्यार की परिभाषा बहुत कठिन है क्योंकि इसका सम्बन्ध अक्सर आसक्ति से जोड़ दिया जाता है जो कि बिल्कुल अलग चीज है। जबकि प्यार का अर्थ, एक साथ महसूस की जाने वाली उन सभी भावनाओं से जुड़ा है, जो मज़बूत लगाव, सम्मान, घनिष्ठता, आकर्षण और मोह से सम्बन्धित हैं। प्यार में होने पर परवाह करने और सुरक्षा प्रदान करने की गहरी भावना व्यक्ति के मन में सदैव बनी रहती है।

प्यार वह अहसास है जो लम्बे समय तक साथ देता है और एक लहर की तरह आकर चला नहीं जाता। इसके विपरीत आसक्ति में व्यक्ति पर प्रबल इच्छाएं या लगाव की भावनाएं हावी हो जाती हैं। यह एक अविवेकी भावना है जिसका कोई आधार नहीं होता और यह थोड़े समय के लिए ही कायम रहती है लेकिन यह बहुत सघन, तीव्र होती है अक्सर जुनून की तरह होती है।

आज के दौर में प्यार फैशन की तरह हो गया है और हर कहीं आपको ऐसे प्रेमी युगल मिल जाएँगे जो दुनिया वालों के तमाम उसूल और रीति-रिवाज ताक में रखकर एक-दूसरे को प्रेम करते हैं। पर क्या सभी प्रेमी अपने साथी के साथ प्रेम की तीव्रता बनाएं रखते हैं या वक्त की दीमक उनके प्रेम को खोखला कर देती है।

प्रेम इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि लैला-मजनू, हीर-रांझा, सोहनी-महिवाल, आदि सभी ने प्रेम क्षेत्र में झंडे गाड़े, पर प्रेम की निश्चित परिभाषा कोई न दे पाया। ऐसा शायद इसलिए भी हुआ कि ये लोग प्रेम की महान अनुभूति से ओत-प्रोत थे, इसलिए ये उसे निश्चित शब्दों में बाँधना नहीं चाहते थे। वे प्रेम के असीम अहसास को सिर्फ महसूस करना चाहते थे, न कि उसे किसी सीमा में बाँधना।

आप भी किसी से प्यार करते हैं तो, जरूर जानना चाहेंगे कि प्यार होता क्या है। यूँ तो प्यार को परिभाषित करना बहुत ही कठिन है, क्योंकि प्यार वो अनुभूति है, जिसे शब्दों में बयाँ करना मुश्किल है। फिर भी हमने इस विषय पर विश्व के कुछ महान विचारकों के विचार नीचे दिए हैं, जो आपको प्रेम को समझने में सहायता करेंगे।
प्यार क्या है? आपने मेरे लेख को पढ़ने के लिए समय निकाला, यह प्यार है। आपने अपने दोस्त से पूछा क्या बात है बहुत परेशान दिख रहे हो, यह प्यार है। आपने अपने घर पर कहा परेशान मत होना, आज वापस लौटने में देर हो सकती है, यह प्यार है। आपने मां-पिताजी को पूछा कि आपकी तबियत कैसी है, यह प्यार है। लेकिन लोगों का क्या कर सकते है, वह एक गाना भी है न, कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना, बस इन्हीं लोगों ने प्यार जैसे सुखद अहसास को नहीं छोडा और इसको जोड दिया उन युवाओं से जो असल में प्यार का मतलब भी नहीं समझते। और फिर जो प्यार का मतलब ही नहीं समझते, वह प्यार को कैसे संभाल सकते है, और फिर हो जाते है बदनाम, और प्यार जैसे खूबसूरत व अद्‌भुत अहसास पर भी बदनामी का दाग लगा देते है। प्यार को महसूस करना और निभाना हरेक इंसान के बस में नहीं होता। आप किसी वस्तु को तो संभाल कर रख सकते हो, क्योंकि वह साकार रूप में आपके सामने मौजूद है। कोई खुशबू को कैद कर सकता है, नहीं। बस प्यार भी खुशबू की तरह ही होता है। जिसको महसूस करने लिए आपको अपनी सोच, अपना व्यवहार बेहतर करने की जरूरत होती है। जिसके पास बेहतर सोच होती है, वह न तो खुद बदनाम होता है और न ही अपनों को कभी बदनाम होने देता है और न ही वह प्यार पर कभी बदनामी का दाग लगाता है। क्योंकि वह अपने साथ-साथ अपनों की भी चिंता करता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि कोई किसी के प्यार में आकर अपने घर-परिवार को भी छोड़ देता है और कहता है कि मैंने यह सब अपने प्यार को पाने के लिए किया है। तो उससे बडा बेवकूफ कोई और नहीं, क्योंकि वह प्यार का मतलब नहीं जानता, वह स्वार्थी तो हो सकता है, पर उसमें प्यार की कोई भावना नहीं होती है। क्योंकि प्यार कभी बगावत करने की प्रेरणा नहीं देता है। प्यार हमेशा आपस में मिलने की प्रेरणा तो सकता है, पर कभी अलग होने की नहीं। आप खुद ही सोचिए जब कभी कोई अपना रूठ जाएं तो अपना हाल कितना बुरा हो जाता है, उसको मनाने के लिए हम क्या नहीं करते। असल में उसको मनाने की प्रेरणा हमको प्यार ही देता है। समझ नहीं आता इतनी छोटी सी बात लोगों की समझ में क्यों नहीं आती है कि प्यार जोडने का काम करता है न कि तोडने का। खामखवाह प्यार को बदनाम करते रहते है। चलिए, खैर कोई बात नहीं। आपने प्यार से इस लेख को पढा, थोडा गुस्सा भी आ रहा होगा, यह क्या लिख दिया। कुछ समझ ही नहीं आ रहा है। पर असल में यही तो प्यार है, जहां डर जैसी कोई बात नहीं है, मन में जो विचार आए आपको बता दिए। अगर आपको अच्छा लगा तो ठीक बात, नहीं तो खुद तो सुधारने की कोशिश की जाएगी, ताकि अगली बार जब आप प्यार से मेरा लेख पढने के लिए अपना बहुमूल्य समय निकाले तो आपको गुस्सा न आए।

प्यार को जताने के लिए जरुरी नहीं कि आप अपने साथी को लाल गुलाब देकर ही अपने प्यार का इजहार करें या सिर्फ कागज पर ही लिख कर उसे अपने दिल की बात बताएं. दिल की बात को जाहिर करने के और भी कई तरीके हैं जो परंपरागत तरीके से बेहद दिलचस्प हैं.

सबसे पहले तो आजकल सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले मोबाइल के प्रयोग से आप अपने दिल की बात कह सकते हैं. मोबाइल से अपने साथी को एक प्यारा सा और छोटा सा एसएमएस भेजिए और गागर में सागर की तरह अपने प्यार को जता दीजिए. आपका यह मैसेज उन्हें सरप्राइज तो करेगा ही आपको सामने होने पर मार खाने से भी बचा लेगा. लेकिन इसका एक साइड इफेक्ट यह है कि कई बार ऐसे मैसेज पढ़कर लड़की सोचती है जब उसमें इजहार करने की ताकत नहीं तो वह प्यार की कठिन कसौटी को कैसे पार करेगा.

अपने प्यार को इजहार करने का एक और बेहतरीन तरीका है डायरी. एक सुंदर सी डायरी में अपने दिल के जज्बातों को उकेर दीजिए और डायरी अपने चाहने वाले को भेंट कर दीजिए और हां, डायरी के अंत में साफ-साफ अक्षरों में अपनी भावनाएं जरुर लिखें ताकि कोई गलतफहमी न रहे. कहीं ऐसा ना हो वह लड़की या लड़का आपको सिर्फ शायर ही समझे और आपके प्यार को पहचान ही न पाए.

वैसे प्यार को जताने का परंपरागत तरीका ही सबसे बेहतर होता है. लड़की के सामने जाओ, आंखों में आंखें डालो और बोल डालो आपको उससे कितनी मोहब्बत है.....

हमारे कुछ महापुरुषों का कहना है कि ,

* 'सच्चा प्रेम कभी प्रति-प्रेम नहीं चाहता।'
कबीरदास

*'पुरुष, प्यार अक्सर और थोड़ा करता है, किंतु स्त्री, प्यार सौभाग्य से और स्थाई करती है।'
आचार्य रजनीश 'ओशो'

*'जिस प्यार में प्यार करने की कोई हद नहीं होती और किसी तरह का पछतावा भी नहीं होता, वही उसका सच्चा रूप है।'
मीर तकी मीर

*'प्यार एक भूत की तरह है, जिसके बारे में बातें तो सभी करते हैं, पर इसके दर्शन बहुत कम लोगों को हुए हैं।'
सिकंदर

*'प्रेम कभी दावा नहीं करता, वह हमेशा देता है। प्रेम हमेशा कष्ट सहता है, न कभी झुंझलाता है और न ही कभी बदला लेता है।'
महात्मा गाँधी

*'खूब किया मैंने दुनिया से प्रेम और मुझसे दुनिया ने, तभी तो मेरी मुस्कुराहट उसके होठों पर थी और उसके सभी आँसू मेरी आँखों में।'
खलील जिब्रान

*'प्रेम आँखों से नहीं ह्रदय से देखता है, इसीलिए प्रेम को अंधा कहा गया है।'
शेक्सपीयर

*'प्रेम के स्पर्श से हर कोई कवि बन जाता है।'
अफलातून

*'जहाँ प्रेम है, वहीं जीवन का सही रूप है।'
अरस्तु

*'प्यार आत्मा की खुराक है।'
कंफ्यूशियस

'प्यार समर्पण और जिम्मेदारी का दूसरा नाम है।'
बेकन
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प्यार क्या है, एक राही की मंज़िल.......
एक बंज़र जमी पर, अमृत की प्यास......
पारस पत्थर को ढुँढ़नें की खोज.......
ना पूरा होने वाला एक सुंदर सपना.....
जैसे की बड़ा मुश्किल हो कोई मिलना....
खो के फिर ना पाया हो कहीं पाया .......
मिल के भी,जो ना हुआ हो अपना........
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प्यार है इक एहसास...
दिल की धड़कनी को छूता राग...
या है पागल वसंती हवा कोई...
या है दिल में झिलमिल करती आशा कोई...
या प्यार है एक सुविधा से जीने की ललक...
जो देती है थके तन और मन को एक मुक्त गगन...
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*'जीवन में प्रेम का वही महत्व है जो फूल में खुशबू का होता है।'
निरंजन कुमार पटेल