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मेरी कलम से: प्यार क्या है ?

Thursday, March 29, 2012

प्यार क्या है ?






प्यार की परिभाषा बहुत कठिन है क्योंकि इसका सम्बन्ध अक्सर आसक्ति से जोड़ दिया जाता है जो कि बिल्कुल अलग चीज है। जबकि प्यार का अर्थ, एक साथ महसूस की जाने वाली उन सभी भावनाओं से जुड़ा है, जो मज़बूत लगाव, सम्मान, घनिष्ठता, आकर्षण और मोह से सम्बन्धित हैं। प्यार में होने पर परवाह करने और सुरक्षा प्रदान करने की गहरी भावना व्यक्ति के मन में सदैव बनी रहती है।

प्यार वह अहसास है जो लम्बे समय तक साथ देता है और एक लहर की तरह आकर चला नहीं जाता। इसके विपरीत आसक्ति में व्यक्ति पर प्रबल इच्छाएं या लगाव की भावनाएं हावी हो जाती हैं। यह एक अविवेकी भावना है जिसका कोई आधार नहीं होता और यह थोड़े समय के लिए ही कायम रहती है लेकिन यह बहुत सघन, तीव्र होती है अक्सर जुनून की तरह होती है।

आज के दौर में प्यार फैशन की तरह हो गया है और हर कहीं आपको ऐसे प्रेमी युगल मिल जाएँगे जो दुनिया वालों के तमाम उसूल और रीति-रिवाज ताक में रखकर एक-दूसरे को प्रेम करते हैं। पर क्या सभी प्रेमी अपने साथी के साथ प्रेम की तीव्रता बनाएं रखते हैं या वक्त की दीमक उनके प्रेम को खोखला कर देती है।

प्रेम इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि लैला-मजनू, हीर-रांझा, सोहनी-महिवाल, आदि सभी ने प्रेम क्षेत्र में झंडे गाड़े, पर प्रेम की निश्चित परिभाषा कोई न दे पाया। ऐसा शायद इसलिए भी हुआ कि ये लोग प्रेम की महान अनुभूति से ओत-प्रोत थे, इसलिए ये उसे निश्चित शब्दों में बाँधना नहीं चाहते थे। वे प्रेम के असीम अहसास को सिर्फ महसूस करना चाहते थे, न कि उसे किसी सीमा में बाँधना।

आप भी किसी से प्यार करते हैं तो, जरूर जानना चाहेंगे कि प्यार होता क्या है। यूँ तो प्यार को परिभाषित करना बहुत ही कठिन है, क्योंकि प्यार वो अनुभूति है, जिसे शब्दों में बयाँ करना मुश्किल है। फिर भी हमने इस विषय पर विश्व के कुछ महान विचारकों के विचार नीचे दिए हैं, जो आपको प्रेम को समझने में सहायता करेंगे।
प्यार क्या है? आपने मेरे लेख को पढ़ने के लिए समय निकाला, यह प्यार है। आपने अपने दोस्त से पूछा क्या बात है बहुत परेशान दिख रहे हो, यह प्यार है। आपने अपने घर पर कहा परेशान मत होना, आज वापस लौटने में देर हो सकती है, यह प्यार है। आपने मां-पिताजी को पूछा कि आपकी तबियत कैसी है, यह प्यार है। लेकिन लोगों का क्या कर सकते है, वह एक गाना भी है न, कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना, बस इन्हीं लोगों ने प्यार जैसे सुखद अहसास को नहीं छोडा और इसको जोड दिया उन युवाओं से जो असल में प्यार का मतलब भी नहीं समझते। और फिर जो प्यार का मतलब ही नहीं समझते, वह प्यार को कैसे संभाल सकते है, और फिर हो जाते है बदनाम, और प्यार जैसे खूबसूरत व अद्‌भुत अहसास पर भी बदनामी का दाग लगा देते है। प्यार को महसूस करना और निभाना हरेक इंसान के बस में नहीं होता। आप किसी वस्तु को तो संभाल कर रख सकते हो, क्योंकि वह साकार रूप में आपके सामने मौजूद है। कोई खुशबू को कैद कर सकता है, नहीं। बस प्यार भी खुशबू की तरह ही होता है। जिसको महसूस करने लिए आपको अपनी सोच, अपना व्यवहार बेहतर करने की जरूरत होती है। जिसके पास बेहतर सोच होती है, वह न तो खुद बदनाम होता है और न ही अपनों को कभी बदनाम होने देता है और न ही वह प्यार पर कभी बदनामी का दाग लगाता है। क्योंकि वह अपने साथ-साथ अपनों की भी चिंता करता है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि कोई किसी के प्यार में आकर अपने घर-परिवार को भी छोड़ देता है और कहता है कि मैंने यह सब अपने प्यार को पाने के लिए किया है। तो उससे बडा बेवकूफ कोई और नहीं, क्योंकि वह प्यार का मतलब नहीं जानता, वह स्वार्थी तो हो सकता है, पर उसमें प्यार की कोई भावना नहीं होती है। क्योंकि प्यार कभी बगावत करने की प्रेरणा नहीं देता है। प्यार हमेशा आपस में मिलने की प्रेरणा तो सकता है, पर कभी अलग होने की नहीं। आप खुद ही सोचिए जब कभी कोई अपना रूठ जाएं तो अपना हाल कितना बुरा हो जाता है, उसको मनाने के लिए हम क्या नहीं करते। असल में उसको मनाने की प्रेरणा हमको प्यार ही देता है। समझ नहीं आता इतनी छोटी सी बात लोगों की समझ में क्यों नहीं आती है कि प्यार जोडने का काम करता है न कि तोडने का। खामखवाह प्यार को बदनाम करते रहते है। चलिए, खैर कोई बात नहीं। आपने प्यार से इस लेख को पढा, थोडा गुस्सा भी आ रहा होगा, यह क्या लिख दिया। कुछ समझ ही नहीं आ रहा है। पर असल में यही तो प्यार है, जहां डर जैसी कोई बात नहीं है, मन में जो विचार आए आपको बता दिए। अगर आपको अच्छा लगा तो ठीक बात, नहीं तो खुद तो सुधारने की कोशिश की जाएगी, ताकि अगली बार जब आप प्यार से मेरा लेख पढने के लिए अपना बहुमूल्य समय निकाले तो आपको गुस्सा न आए।

प्यार को जताने के लिए जरुरी नहीं कि आप अपने साथी को लाल गुलाब देकर ही अपने प्यार का इजहार करें या सिर्फ कागज पर ही लिख कर उसे अपने दिल की बात बताएं. दिल की बात को जाहिर करने के और भी कई तरीके हैं जो परंपरागत तरीके से बेहद दिलचस्प हैं.

सबसे पहले तो आजकल सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले मोबाइल के प्रयोग से आप अपने दिल की बात कह सकते हैं. मोबाइल से अपने साथी को एक प्यारा सा और छोटा सा एसएमएस भेजिए और गागर में सागर की तरह अपने प्यार को जता दीजिए. आपका यह मैसेज उन्हें सरप्राइज तो करेगा ही आपको सामने होने पर मार खाने से भी बचा लेगा. लेकिन इसका एक साइड इफेक्ट यह है कि कई बार ऐसे मैसेज पढ़कर लड़की सोचती है जब उसमें इजहार करने की ताकत नहीं तो वह प्यार की कठिन कसौटी को कैसे पार करेगा.

अपने प्यार को इजहार करने का एक और बेहतरीन तरीका है डायरी. एक सुंदर सी डायरी में अपने दिल के जज्बातों को उकेर दीजिए और डायरी अपने चाहने वाले को भेंट कर दीजिए और हां, डायरी के अंत में साफ-साफ अक्षरों में अपनी भावनाएं जरुर लिखें ताकि कोई गलतफहमी न रहे. कहीं ऐसा ना हो वह लड़की या लड़का आपको सिर्फ शायर ही समझे और आपके प्यार को पहचान ही न पाए.

वैसे प्यार को जताने का परंपरागत तरीका ही सबसे बेहतर होता है. लड़की के सामने जाओ, आंखों में आंखें डालो और बोल डालो आपको उससे कितनी मोहब्बत है.....

हमारे कुछ महापुरुषों का कहना है कि ,

* 'सच्चा प्रेम कभी प्रति-प्रेम नहीं चाहता।'
कबीरदास

*'पुरुष, प्यार अक्सर और थोड़ा करता है, किंतु स्त्री, प्यार सौभाग्य से और स्थाई करती है।'
आचार्य रजनीश 'ओशो'

*'जिस प्यार में प्यार करने की कोई हद नहीं होती और किसी तरह का पछतावा भी नहीं होता, वही उसका सच्चा रूप है।'
मीर तकी मीर

*'प्यार एक भूत की तरह है, जिसके बारे में बातें तो सभी करते हैं, पर इसके दर्शन बहुत कम लोगों को हुए हैं।'
सिकंदर

*'प्रेम कभी दावा नहीं करता, वह हमेशा देता है। प्रेम हमेशा कष्ट सहता है, न कभी झुंझलाता है और न ही कभी बदला लेता है।'
महात्मा गाँधी

*'खूब किया मैंने दुनिया से प्रेम और मुझसे दुनिया ने, तभी तो मेरी मुस्कुराहट उसके होठों पर थी और उसके सभी आँसू मेरी आँखों में।'
खलील जिब्रान

*'प्रेम आँखों से नहीं ह्रदय से देखता है, इसीलिए प्रेम को अंधा कहा गया है।'
शेक्सपीयर

*'प्रेम के स्पर्श से हर कोई कवि बन जाता है।'
अफलातून

*'जहाँ प्रेम है, वहीं जीवन का सही रूप है।'
अरस्तु

*'प्यार आत्मा की खुराक है।'
कंफ्यूशियस

'प्यार समर्पण और जिम्मेदारी का दूसरा नाम है।'
बेकन
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प्यार क्या है, एक राही की मंज़िल.......
एक बंज़र जमी पर, अमृत की प्यास......
पारस पत्थर को ढुँढ़नें की खोज.......
ना पूरा होने वाला एक सुंदर सपना.....
जैसे की बड़ा मुश्किल हो कोई मिलना....
खो के फिर ना पाया हो कहीं पाया .......
मिल के भी,जो ना हुआ हो अपना........
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प्यार है इक एहसास...
दिल की धड़कनी को छूता राग...
या है पागल वसंती हवा कोई...
या है दिल में झिलमिल करती आशा कोई...
या प्यार है एक सुविधा से जीने की ललक...
जो देती है थके तन और मन को एक मुक्त गगन...
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*'जीवन में प्रेम का वही महत्व है जो फूल में खुशबू का होता है।'
निरंजन कुमार पटेल

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